कप्तानी मुझे मिलने वाली थी लेकिन Dhoni खेल गया, मैं ये कभी नहीं भूलूंगा : Yuvraj Singh

Yuvraj Singh Deserves Captaincy in 2007 T-20 World Cup Instead of Dhoni:  2007 टी-20 विश्व कप युवी पाजी के लिए बेहद खास था. इसी विश्व कप में इन्होंने मात्र 12 गेंद पर अर्धशतक लगा दिया था. साथ ही इंग्लैंड के स्टुअर्ट ब्राड को एक ही ओवर में छह छक्के भी जड़ दिए थे. इतना ही नहीं सेमीफाइनल में भी युवी (Yuvraj Singh) ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 70 रन की अक्रामक पारी खेली थी. मगर एक बात का दुख उन्हें हमेशा रहेगा. क्योंकि युवराज सिंह को कप्तानी चाहिए थी…

2007 वनडे विश्व कप में जब भारतीय टीम पहले ही दौर में बांग्लादेश से हारकर बाहर हो गई थी. तब शर्मनाक हार के बाद राहुल द्राविड़ ने टीम की कप्तानी छोड़ दी थी. ये वो ही वक्त था जब पहली टी-20 विश्व कप कराया जाना था. सौरव गांगुली, राहुल द्राविड़ और सचिन तेंदुलकर समेत कई दिग्गजों ने टी-20 विश्व कप से अपना नाम वापस ले लिया था कि वो इस विश्व कप में नहीं खेलेंगे. जिसके फर स्वरूप जो टीम साउथ अफ्रीका टी-20 विश्व कप खेलने गई उसमें सभी युवा ही थे.

युवराज को थी टीम का कप्तान बनने की उम्मीद

हाल ही में युवराज का एक बयान सामने आया है. इसमें उन्होंने कप्तानी न मिलने का दर्द बयां किया है. गौरतलब है कि युवराज को ऐसा लगता है कि उनके साथ काफी बुरा हुआ था. क्योंकि 2007 में वो टी-20 विश्व कप टीम को लीड करना डिजर्व करते थे. मगर इंडियन चयनकर्ताओं ने उन्हें दरकिनार कर धोनी को कप्तानी दे दी थी.

Yuvraj Singh 2007 World Cup

युवराज आगे बताते हैं कि…साल 2007 में भारत पहले 50 ओवर विश्व कप में बुरी तरह हारकर बाहुथ हो गया था. जिस वजह से काफी खलबली मची हुई थी. इसी के फौरन बाद भारत को इंग्लैंड का दौरा करना था जो कि दो महीने का था. उसके बाद टीम को साउथ अफ्रीका समेत आयरलैंड भी जाना था. इन्हीं सब के बीच टी-20 का विश्व कप का भी शेड्यूल आ गया था. मतलब खिलाड़ियों को लगातार चार महीने घर से बाहर रहना था.

ऐसे में उम्मीद थी कि मुझे कप्तानी मिलेगी

युवी आगे बताते हैं कि ऐसे में उन्हें लगा कि सीनियर खिलाड़ियों का ब्रेक लेना उनके लिए लकी साबित होगा. क्योंकि मुझे लगा कि कप्तानी पर मेरा हक था. मगर कुछ वक्त बाद ही टीम का कप्तान धोनी को बना दिया गया. लेकिन मेरा दिल टूट गया था. क्योंकि आप चाहे या न चाहे पर आपोक स्वभाविक तौर पर उस खिलाड़ी को सपोर्ट करना पड़ेगा जो टीम का कप्तान होगा. फिर चाहे वो धोनी हो या कोई और कप्तान क्योंकि आखिरकार आप एक टीममैन कहलाना चाहते हैं. लेकिन मुझे कप्तानी न मिलने का दुख जिंदगी भर रहेगा.

शायद ऐसा इसलिए भी हुआ था क्योंकि धोनी के ऊपर कई बड़े लोगों का हाथ था. वो टीम में भी उन्हीं की वजह से आया था. बाकी उसने अपनी बल्लेबाजी से सारा मुकाम हासिल कर लिया.

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