‘वो मेरी जिंदगी के सबसे मुश्किल 60 रन थे, न बनते तो मैं बर्बाद था’- Sehwag

Virender Sehwag: टीम इंडिया के मजबूत सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने अपने करियर में कुल 104 टेस्ट मैच खेले हैं। उन्होंने इस दौरान दो बार ट्रिपल शतक भी जड़ा है। वहीँ वीरेंद्र सहवाग के क्रिकेट करियर में एक ऐसा वक़्त भी आया जब साल 2007 में इस विस्फोटक ओपनर का क्रिकेट करियर खत्म हो जाता। तभी एक एक शख्स ने वीरेंद्र सहवाग को क्रिकेट से नाता तोड़ने से रोक लिया और जिसके बाद सहवाग ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। चलिए जानते हैं उस इंसान के बारे में।

इस शख्स ने बचाया Sehwag का करियर

दरअसल, साल 2001 में टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू करने वाले सहवाग को साल 2007 में भारतीय टीम से ख़राब फॉर्म के चलते बाहर कर दिया गया था, जिसके बाद लगभग एक साल तक वह इंडिया टीम का हिस्सा नहीं रहे थे, जिसके बाद सहवाग क्रिकेट में दोबारा वापसी के बारे में सोच भी नहीं रहे थे, लेकिन एक शख्स ने उनको जीवनदान दिया।

 

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यह कोई और नहीं बल्कि टीम इंडिया के उस समय के कप्तान अनिल कुंबले थे। वीरेंद्र सहवाग (Virender Sehwag) की साल 2008 में अनिल कुंबले ने ही भारतीय टीम में वापसी कराई थी। एक इंटरव्यू में सहवाग ने बताया कि मुझे अचानक मालूम हुआ कि मैं भारतीय टेस्ट टीम में शामिल नहीं हूँ। उन्होंने कहा कि “मुझे अचानक साल 2007 में बताया गया कि मैं इंडियन टेस्ट टीम का पार्ट नहीं हूँ। अगर मुझे उस एक साल के लिए बाहर नहीं किया गया होता तो मैं टेस्ट क्रिकेट में 10,000 रन पूरे कर लेता।

Sehwag की जिंदगी इन 60 रनों ने बदली

सहवाग ने कहा ” टीम इंडिय के पूर्व टेस्ट कप्तान अनिल कुंबले की वजह से क्रिकेट में मेरी वापसी हुई। हुआ कुछ ऐसा था कि ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर पर्थ में तीसरा टेस्ट मैच खेला जाना था, वहीँ उसके पहले प्रैक्टिस मैच चल रहा था। ऐसे में अनिल कुंबले ने सहवाग से कहा कि इस प्रैक्टिस मैच में अर्धशतक बनाओ और तुम्हे पर्थ टेस्ट में शामिल कर लिया जाएगा। वहीँ लंच ब्रेक से पहले ही सहवाग ने शतक जड़ दिया। बता दें कि प्रैक्टिस मैच में ऐसा करने के बाद उन्हें टीम में शामिल कर लिया गया।

अनिल कुंबले (Anil Kumble) ने ‘उस दौरे के बाद मुझसे वादा करते हुए कहा कि जब तक टेस्ट कप्तान हूँ तुम कभी टीम से बाहर नहीं रहोगे। मेरे लिए वो 60 रन जिंदगी के सबसे मुश्किल थे। मैं अनिल भाई के भरोसे को साबित करने के लिए खेल रहा है, क्योंकि मैं ये नहीं चाहता था कि अनिल भाई पर मुझे ले जाने को लेकर कोई भी सवाल नहीं खड़ा हो।”

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