Virat Kohli का बोल्ड स्टेटमेंट, रोहित से झगड़े में खराब हुआ खेल, फिर उसी ने संभाला

रिश्तों की तासीर को समझना आसान नहीं। जिस रोहित से झगड़े के कारण विराट कोहली का खेल खराब हुआ उसी के संबल से चमक भी वापस हुई। कप्तानी विवाद ने कोहली के करियर को बुरी तरह प्रभावित किया। इस विवाद के बाद रोहित शर्मा तीनों प्रारूपों के कप्तान बने। कप्तानी से हटने के बाद कोहली की एकाग्रता भंग हो गयी। ईगो की समस्या से उनका ध्यान खेल से भटक गया। उनकी बैटिंग इतनी खराब हो गयी कि टीम से निकालने की मांग होने लगी। कोहली का चमकता हुआ करियर दांव पर लगा गया। तब इस मुश्किल वक्त में कोई और नहीं बल्कि रोहित शर्मा ही उनके साथ खड़े हुए।

रोहित ने दिया साथ
कप्तान रोहित ने कोहली के साथ अपनी पुरानी खुन्नस भूला कर उनका समर्थन किया। उनको एशिया कप में चुने जाने की रोहित वकालत की। इस विश्वास का नतीजा है कि कोहली आज एशिया कप -2022 के सबसे सफल बल्लेबाज हैं। खुद कोहली ने अपनी फॉर्म वापसी के लिए रोहित शर्मा और राहुल द्रविड़ की जमकर तारीफ की। कुछ क्रिकेट जानकारों का कहना है कि कोहली ने अगर रोहित के साथ झगड़े में अपनी ऊर्जा बर्बाद नहीं की होती तो वे दो साल पहले ही 71 वां शतक मार सकते थे।

रोहित के साथ झगड़ा
दिसम्बर 2021 में रोहित को वनडे टीम का कप्तान बनाया गया था तब विराट कोहली असहज हो गये थे। कहा जाता है कि कोहली रोहित की कप्तानी में वनडे नहीं खेलना चाहते थे। इसलिए क्रिकेट से कुछ समय का ब्रेक ले लिया था। 2019 में विश्वकप सेमीफाइनल में हार के बाद रोहित और कोहली में मनमुटाव बढ़ गया था। हालांकि इस झगड़े पर पर्दा डालने भरपूर कोशिश की गयी थी। लेकिन सच बाहर आ गया था।

झगड़े से बीसीसीआई भी था परेशान
अगस्त 2019 में मुख्य कोच की नियुक्ति के लिए इंटरव्यू हुआ था। बीसीसीआइ की एडवाइजरी कमेटी ने इसका इंटरव्यू लिया था। कपिल देव इसके अध्यक्ष थे। कोच पद के एक उम्मीदवार से एडवाइजरी कमेटी ने एक सवाल पूछा था, अगर आप कोच बनते हैं तो विराट कोहली और रोहित शर्मा के बीच झगड़े को कैसे सुलाझाएंगे ? हालांकि इस उम्मीदवार का चयन नहीं हुआ और रवि शास्त्री को फिर हेड कोच बनाया गया। लेकिन इस सवाल से यह साफ हो गया था कि विराट और रोहित में झगड़ा था जिससे बीसीसीआइ बहुत परेशान थी।

वक्त ऐसे बदला
नवम्बर 2019 से कोहली शतक नहीं लगा पा रहे। दूसरी तरफ रोहित शर्मा सीमित ओवरों के क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन कर रहे थे। कोहली ने टी-20 की कप्तानी खुद छोड़ी थी। लेकिन वनडे क्रिकेट की कप्तानी से उन्हें हटाया गया था। उनकी जगह रोहित को कप्तान बनाया गया था। ये दिसम्बर 2021 की बात है। लगभग 3 साल बाद विराट कोहली ने किसी अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच में शतक बनाया। एशिया कप में उन्होंने अफगानिस्तान के खिलाफ जो पारी (61 गेंदों पर 122 रन) खेली वो पुराने विराट की झलक थी। अब कुल अंतर्राष्ट्रीय शतकों के मामले में भारत रत्न सचिन तेंदुलकर ही उनसे आगे हैं। कोहली ने टी-20 इंटरनेशनल में पहली बार शतक मारा। जाहिर है कोहली भारत ही नहीं दुनिया के विशिष्ट क्रिकेटरों में एक है। फिर नवम्बर 2019 के बाद से वे रन क्यों नहीं बना पा रहे थे ?

करीब 3 साल बाद कैसे बना शतक?
क्रिकेट कौशल के साथ-साथ दिमाग का भी खेल है। रन नहीं बनने से विराट विचलित थे। हर तरफ उनकी ओचलोचना हो रही थी। मानसिक एकाग्रता पाने के लिए विराट कोहली को भावनात्मक सहारे की जरूरत थी। इस कठिन समय में टीम प्रबंधन और पत्नी अनुष्का शर्मा ने उनका बखूबी साथ दिया। उन्हें सहज होने के लिए समय दिया गया। बाद में कोहली ने बताया भी कि ब्रेक के बाद जब वे एशिया कप के लिए टीम में आये तो खुद को बहुत सहज महसूस कर रहे थे। ड्रेसिंग रूम के सकारात्मक माहौल ने उन्हें अच्छा खेलने के लिए प्रेरित किया।

रोहित को कहा शुक्रिया
रोहित के साथ मजाकिया बातचीत में कोहली ने कहा, अपने 13-14 साल के करियर में पहली बार इतने अधिक समय (ब्रेक में) तक बल्ले को हाथ नहीं लगाया। तुम लोगों और मैनेजमेंट ने सीधा संदेश दिया कि मुझे खेलने की आजादी है। तुम लोगों ने मुझे जो स्पेश दी उससे बहुत ताजगी महसूस हुई। क्रिकेट के अलावा भी मैंने कई चीजें समझीं। मुझे लगता है कि ये सब चीजें मेरे लिए बहुत जरूरी थीं। इन सब चीजों से बहुत फर्क पड़ा। किसी ने सोचा नहीं था कि इतने समय बाद मैं टी-20 इंटरनेशनल में शतक बनाउंगा। लेकिन मैं खुश हूं कि मैंने ऐसा किया।

द्रविड़ से भी हुई थी बात
कोहली ने आगे कहा, मैंने राहुल भाई (राहुल द्रविड़) से बात की थी। मैंने बताया था कि अगर पहले बैटिंग करनी पड़े तो बीच के ओवरों में कैसे रन गति बढ़ा सकता हूं। मैंने सोचा था कि जो चीजें मुझे वर्ल्ड कप ( टी-20 वर्ल्ड कप) में करनी हैं उसको पहले मैं एशिया कप में आजमाऊंगा। रोहित शर्मा और विराट कोहली की यह बातचीत एक नयी तस्वीर पेश करती है। अब दोनों एक दूसरे का सम्मान करते हैं। टीम में एक दूसरे की अहमियत भी समझते हैं। यह भरोसा और विश्वास भारत के मिशन मेलबर्न में उत्प्रेरक का काम करेगा।

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