अब 14 करोड़ी दीपक चाहर को गुस्साई CSK नहीं देगी एक ‘फूटी कौड़ी’, जानिए क्या है नियम

चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के स्विंगस्टार दीपक चाहर (Deepak Chahar) आखिरकार आईपीएल से बाहर हो गए हैं. ऐसा उनकी चोट के चलते हुआ है. दीपक चाहर (Deepak Chahar) को उनकी चोट की वजह से बहुत ही जबरदस्त आर्थिक नुकसान सहना पड़ा है. बता दें कि दीपक चाहर ने उन्हें 14 करोड़ की बड़ी धनराशि में खरीदा था. इसका मतलब ये होता है कि सीएसके (CSK) उन्हें अगले 3 साल तक हर बार 14 करोड़ देने वाली थी. मगर चोट की वजह से उनकी सैलरी पर मोटा प्रहार हो गया है.

आईपीएल नियमों के हिसाब से उन्हें चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) अब एक चवन्नी भी नहीं देगी. इसका सीधा मतलब ये है कि जिस खिलाड़ी की कमाई अगले तीन साल में 42 करोड़ होनी वाली थी. वो अब अर्श से फर्श पर आ गया है. तो चलिए आपको बताते हैं फ्रेंचाइजी टीमों की भुगतान की प्रकिया और उनके 8 नियम.

1. नीलामी में उजागर हुई रकम खिलाड़ियों की सैलरी कही जाती है. इन पैसों पर उसी हिसाब से टैक्स भी काटा जाता है. साथ ही इन पैसों पर कोई दूसरा शख्स दावा नहीं कर सकता है. ये पैसे खिलाड़ी के खाते में ही जाते हैं.

2. नीलामी में उजागर हुई रकम महज एक साल के लिए होती है. यानी अगर खिलाड़ी को 14 करोड़ में खरीदा गया है तो उसे हर साल 14 करोड़ भुगतान किया जाएगा. जिसका कुल भुगतान तीन साल में 43 करोड़ होगा.

3. 2008 की नीलामी के वक्त खिलाड़ियों का वेतन यूएस डॉलर में दिया जाता था. उस वक्त एक डॉलर की कीमत 40 रुपए थी. 2012 में इस वापस रुपए में तब्दील किया गया.

4. अगर कोई खिलाड़ी पूरे सीजन में फिट रहता है और एक भी मैच टीम के लिए खेलता है. या नहीं भी खेलता है मगर टीम के साथ होता है तो उसे पूरी रकम का भुगतान किया जाता है. साल 2013 में ग्लेन मैक्सवेल करोड़ में बिके और खेले सिर्फ 3 मैच मगर उन्हें पैसे पूरे दिए गए थे.

5. अगर खिलाड़ी लीग शुरू से होने से पहले ही चोटिल हो जाता है. तो उसे एक रुपए भी नहीं दिया जाता. इसके इतर अगर वो कुछ मैच के लिए ही उपलब्ध है तो उसे रकम का 10 प्रतिशत भुगतान किया जाता है.

6. अगर कोई आईपीएल खिलाड़ी टीम के साथ जुड़ चुका होता है. कैंप का हिस्सा होता है और तब सीजन शुरू होने से पहले चोटिल होता है तो उसे 50 प्रतिशत धनराशि का भुगतान किया जाता है. मोहम्मद शमी और ड्वेन ब्रावो ऐसी कमाई कर चुके हैं.

7. अगर कोई खिलाड़ी लीग के दौरान चोटिल होता है तो फ्रेंचाइजी उसका खर्चा उठाती है.

8. लीग में मौजूद फ्रेंचाइजी खिलाड़ियों को सारा पैसा पहले ही नहीं दे देती है. वो जैसे-जैसे लीग आगे बढ़ती है. उन्हें कमाई होती है वो भुगतान करते जाते हैं. हर फ्रेंचाइजी का भुगतान करने का तरीका अलग होता है.

 

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