दीपक चाहर ने अपने दरियादिली से जीता सभी फैंस का दिल, ‘मांकड़’ आउट करके भी नही की अपील!

क्रिकेट के मैदान में अक्सर किसी न किसी तरह का ड्रामा होता रहता है। कभी कोई काम करने पर बवाल होता है, तो कई बार वही काम न करने पर जमकर चर्चाएं होने लगती हैं। कुछ ऐसा ही मामला है मैदान पर गेंदबाज द्वारा नॉन स्ट्राइकर को रन आउट करना या नहीं करना। करीब तीन साल पहले आईपीएल में दिग्गज भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने जॉस बटलर को इस तरह से आउट किया था, जिस पर बवाल हो गया था। कई गेंदबाज इससे बचते रहे हैं। भारतीय गेंदबाज दीपक चाहर भी अब इस मामले को लेकर अपने एक्शन से चर्चा में है।

दरअसल, जिम्बाब्वे के खिलाफ तीसरे और आखिरी वनडे में मांकड़िंग रन आउट देखने को मिला, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि बल्लेबाज आउट नहीं हुआ। हरारे स्पोर्ट्स क्लब में लगातार तीसरा टॉस जीतने के बाद भारत ने इस बार बल्लेबाजी चुनी। पहले बैटिंग करते हुए शुभमन गिल के शतक के बूते स्कोरबोर्ड पर 289 रन टांगे। अब 290 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी जिम्बाब्वे टीम को पहली ही गेंद पर बड़ा झटका लगता, लेकिन दीपक चाहर ने खेल भावना का परिचय दिखाया।

दीपक चाहर ने दिखाई दरियादिली

भारतीय टीम के खिलाफ तीसरे वनडे मैच में जब मेजबान टीम 290 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी तो पारी की पहली गेंद दीपक चाहर फेंकने ही वाले थे कि नॉन स्ट्राइकर इनोसेंट कीया क्रीज छोड़ रहे थे। ये बात दीपक चाहर ने देखी तो उन्होंने गेंद के लिए एक्शन में आने से पहले नॉन स्ट्राइक की बेल्स उड़ा दीं। अगर दीपक चाहर रन आउट की अपील कर देते तो उनको पवेलियन लौटना पड़ता, लेकिन चाहर ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने दरियादिली दिखाते हुए बल्लेबाज को एक महत्वपूर्ण जीवनदान दे दिया।

हालांकि, इनोसेंट कीया को दीपक चाहर ने ही lbw आउट कर दिया। वे 6 रन ही बना सके। वहीं, दीपक चाहर के इस मूव की तारीफ हो रही है, लेकिन वो दिन अब दूर नहीं है, जब इस तरह से करने पर खिलाड़ी को अंपायर ही आउट दे देगा। 1 अक्टूबर या इसके बाद में अगर इस तरह की कोई घटना होगी तो अंपायर भी आउट दे देगा। अभी तक अंपायर सिर्फ उसी स्थिति में बल्लेबाज को आउट दे सकता है, जब गेंदबाज रन आउट की अपील करे। इस मामले में दीपक चाहर ने अपील नहीं की थी।

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