Pujara की वजह से नहीं हो पाया था Pant का शतक, बोले- मन था मुक्का मार दूं

Cheteshwar Pujara and Rishabh Pant heroics: 2020-21 में ऑस्ट्रेलिया के देश में एक ऐतिहासिक सीरीज खेली गई थी. ये सीरीज भारत ने जीतकर दुनियाभर में अपना परचम लहराया था. इस बॉर्डर-गावस्कर सीरीज के पहले मुकाबले में भारतीय टीम पहले मैच की दूसरी पारी में महज 36 रनों पर सिमट चुकी थी. जिसके बाद भारत ने दूसरे और तीसरे टेस्ट में शानदार वापसी की. ऑस्ट्रेलिया ने पहला मैच जीता तो दूसरा भारत ने. तीसरे मैच में ऑस्ट्रेलिया ने 407 रन का टारगेट दिया था.

उस वक्त चेतेश्वर पुजारा (Cheteshwar Pujara) और ऋषभ पंत (Rishabh Pant) ने अच्छी पारी खेली और मैच ड्रा कराने में अहम योगदान दिया. अब उस मैच को याद करके ऋषभ पंत कहते हैं कि अगर उस समय पुजारा ने उससे कुछ ना कहा होता तो वह शायद शतक बना देते.

तीसरे टेस्ट के अंतिम दिन एक मोड़ ऐसा आ गया था जब अजिंक्य रहाणे (Ajinkya Rahane) का विकेट गिर गया. जिसके बाद मैच बचाने का जिम्मा पुजारा और पंत पर आ गया था. दोनों ने चौथे विकेट के लिए 148 रनों की पार्टरनशिप की. इस साझेदारी में ऋषभ पंत ने अकेले 97 रन बना दिए थे. इस पारी में उन्होंने 12 और 3 छक्के लगा दिए.

ऋषभ पंत ने ‘बंदे में था दम’ की डॉक्यूमेंट्री में पुजारा की बातों को याद करते हुए कहा कि उस मैच में पुजारा ने कहा था कि ‘ऋषभ… विकेट बचाने की कोशिश करो. सिंगल डबल्स से भी काम चला सकते हो. आपको बाउंड्री मारने की जरूरत नहीं है.

 

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पंत कहता है कि उसे उस वक्त पुजारा पर बहुत ज्यादा गुस्सा आ रहा था. उन्होंने उसे दोहरी मनोस्थिति में डाल दिया था. जब कि मैं लप्पे लगा-लगाकर अच्छे रन बना था. मेरे दिमाग में उस समय एक ही बात चल रही थी कि अगर मैं शतक लगा लेता हूं तो यह मेरे सर्वश्रेष्ठ में से एक होता. क्योंकि मैंने उस समय अच्छी गति प्राप्त कर ली थी.

गौरतलब है कि ऋषभ पंत शतक नहीं लगा पाए और वो 97 रन पर आउट हो गए. अंजिक्य रहाणे ने बताया कि जब पंत आउट होकर अंदर आया तो वो काफी ज्यादा गुस्से में था और निराश था. उसने कहा कि पुजारा भाई और उसने मुझे कहा कि तुम 97 पर हो सिंगल-डबल से शतक बना लो.

जबकि मुझे नहीं पता था कि मैं 97 पर हूं. अगर उस वक्त पुजारा ने कुछ नहीं कहा होता तो मैं शतक मार चुका होता. मगर जब वो आउट हुआ तो उसका मन था कि चेतेश्वर पुजारा का मुंह तोड़ दे क्योंकि वो उसके करियर की अभी तक की सबसे अच्छी पारी थी.

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